महिला: समाज में सफलता एवं शक्ति का नया रूप

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महिला: समाज में सफलता एवं शक्ति का नया रूप

हमारे पुराणों में नारी को हमेशा शक्ति स्वरूप माना गया है, पर जहाँ तक इसे व्यवहार में लाने की बात है तो इसके विपरीत हमारे समाज में नारी को सदैव अबला, कमजोर व पुरुष के बिना बेसहारा माना गया है. उसके अस्तित्व को हमेशा पुरुष के साथ जोड़कर देखा जाता है. चाहे वो उसका पिता हो, भाई हो, पति हो या पुत्र, मानो इससे अलग उसकी कोई पहचान ही नहीं.

पर अब ये परिभाषा धीरे-धीरे बदल रही है और आज नारी अपनी काबिलियत और आत्मविश्वास के दम पर समाज में अपनी एक अलग पहचान बना रही है, आज वह स्त्री-पुरुष के भेद को मिटाकर हर वो मुकाम हासिल कर रही हैं, जिन पर हमेशा से पुरुषों का वर्चस्व रहा है. वह एक मिसाल के तौर पर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है.

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आज हमारे समाज में हमें ऐसे सैकड़ों उदाहरण मिल जायेंगे जहाँ स्त्री ने, अपने लिए तय किये गये दायरों से बाहर निकलकर खुद को एक नयी उड़ान दी है. किरन बेदी, स्मृति इरानी व स्मृता सबरवाल जैसी महिलाओं ने अपनी मेहनत से सफलता का वो परचम लहराया कि आज वो करोड़ों महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही हैं.

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अब महिला खुद की पहचान के लिए किसी की मोहताज़ नहीं, उसकी खुद की एक नयी पहचान है. चाहे बोर्ड एग्जाम हो या सिविल सर्विस जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाएं, महिला हर वर्ष सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं. इसका ताजा उदाहारण सिविल सर्विस 2014 का परीक्षा परिणाम है, जिसमें प्रथम टॉप 5 में पहले चार स्थानों में लडकियों ने जगह बनाई है. इस परीक्षा की टॉपर इरा सहगल सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत है. इरा ने कभी किसी भी बाधा को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दी, और देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में नंबर एक की पोजीशन हासिल की.

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source:www.newindianexpress

सफलता पर किसी वर्ग, जाति या लिंग विशेष का हक नहीं है, इसे हर वो शख्स पा सकता है, जो इसे पाना चाहता है. जरूरत है तो बस अपनी शक्ति पहचानने की, अपनी काबिलियत  पर भरोसा करने की. फिर आपको सफलता की ऊँचाई छूने से कोई नहीं रोक सकता.

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