भावनाएं किस तरह आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं

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भावनाएं किस तरह आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं

क्रोध:

क्रोध यानि गुस्सा, मनुष्यों में सामान्य बात है. किसी के द्वारा हमला करने, बेइज्जती, या परेशान करने पर यह एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है जो अचानक निकलती है. एक हद तक यह लाभदायक भी है, लेकिन अत्यधिक क्रोध किसी मानसिक बीमारी का भी संकेत हो सकता है. यह हमारे रिश्तों के साथ-साथ हमारे शरीर को भी नुकसान पहुँचाता है. यह हमारे लीवर, पाचन क्रिया व रक्त संचार को बहुत बुरी तरह प्रभावित करता है.

anger
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तनाव:

एक सीमा तक तनाव हमारे लिए लाभदायक है, जिससे कि हम दिए गए कार्य और जिम्मेदारी को समय से पूरा करते हैं. परन्तु जब हम हमारी क्षमता से बाहर शारीरिक या मानसिक तौर पर अत्यधिक दबाव महसूस करते हैं, तब तनाव की हानिकारक स्थिति उत्पन्न होती है. इस तरह का तनाव एक मानसिक परेशानी है. तनाव हमारे दिल और दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इससे ब्लड प्रेशर बहुत अधिक बढ़ जाता है तथा दिल की धडकनें तेज़ हो जाती हैं. यह प्रतिरोधक क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है, और अनिद्रा का भी एक बड़ा कारण है.

stress
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चिन्ता:

चिन्ता तब तक लाभदायक है, जब तक यह किसी समस्या को सुलझाने में हमारी मदद करता है, परन्तु हर छोटी-बड़ी बात पर बेवजह अत्यधिक चिन्ता लेकर बैठ जाना हमारे शरीर को नुकसान पहुँचाता है. एक पुरानी कहावत है कि ‘चिन्ता, चिता से भी अधिक हानिकारक है. चिता, मनुष्य को एक बार जलाती है. परन्तु चिन्ता उसे हर दिन धीरे-धीरे नष्ट करती है.’ चिन्ता, भूख न लगना, अनिद्रा व पेट सम्बन्धी अन्य परेशानियों का प्रमुख कारण है.

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डर:

कल्पना कीजिये, आप घर पर अकेले हैं और टीवी पर कोई हॉरर शो देख रहे हैं. अचानक आपको एक तेज़ आवाज़ सुनाई देती है और दरवाजा अचानक बन्द हो जाता है. आपकी दिल की धड़कने तेज हो जाती हैं, मांसपेशियां कस जाती हैं और आपकी सांसों की रफ्तार बढ़ जाती है. बाद में आपको पता चलता है कि वह और कुछ नही, सिर्फ हवा थी. वो जो कुछ आपने महसूस किया वो आपका डर था. डर शारीरिक एवं मानसिक खतरे के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया है, यदि हम डर को जरा भी महसूस नहीं करते तो हम कई तरह के खतरों में पड़ सकते हैं. परन्तु अत्यधिक डर हमें कई तरह की परेशानियों में डाल सकता है. डर हमें मानसिक बीमार बना सकता है, साथ ही साथ डर हमारी किडनी को भी कमजोर करता है.

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दुःख:

दुःख किसी प्रिय वस्तु या व्यक्ति को खोने पर आने वाली एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है. किसी अपने को खोना या अपनी किसी प्रिय वस्तु को खोना, जिससे हम अत्यधिक जुड़े थे, अत्यंत दर्दनाक होता है. परन्तु अपने दुःख पर काबू न पाना अन्य कई परेशानियों को आमंत्रित करता है. लम्बे समय तक दुःख डिप्रेशन का कारण बनता है. दुःख आपकी नींद, भूख-प्यास व सुकून को बुरी तरह प्रभावित करता है, जिसका नकारात्मक प्रभाव हमारे फेफड़ों पर पड़ता है.

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