जानिए क्यों इस लड़की को “हैप्पी टू ब्लीड” मुहिम शुरू करनी पड़ी!

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जानिए क्यों इस लड़की को “हैप्पी टू ब्लीड” मुहिम शुरू करनी पड़ी!

आजकल सोशल मीडिया पर ‘हैप्पी टू ब्लीड’ नाम की मुहीम काफी वायरल हो रही है. क्या आप जानते है यह मुहिम क्यों और किस मकसद से शुरू करनी पड़ी? तो चलिए हम आपको बताते है, इस मुहिम से जुड़ी हुई सारी बातें.

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पिछले कुछ सालों में महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर हमारे समाज में जितनी गलतफहमियां या अंधविश्वास फैले हैं उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर महिलाएं तो अकसर अपना विचार या कमेंट देती रही हैं. लेकिन अब तक पुरुषों के द्वारा इस पर कोई कमेंट नहीं किया गया था.

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त्रावणकोर देवाश्वम बोर्ड के अध्यक्ष गोपालकृष्णन ने बयान दिया है कि ‘महिलाओं को प्रसिद्ध साबरीमला मंदिर में प्रवेश की अनुमति तब तक नहीं दी जाएगी जब तक उनकी शुद्धता की जांच करने वाली मशीन का आविष्कार नहीं हो जायें.’

गोपालकृष्णन के इस कथन के बाद पटियाला की निकिता आजाद ने फ़ेसबुक पर ‘हैप्पी टू ब्लीड’ पेज बनाया जिसमें उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया है कि “वो ये चार्ट या सेनिटरी नैपकिन लेकर अपनी तस्वीर पोस्ट करें ताकि सदियों पुराने इस पितृसत्तात्मक या पुरुषवादी समाज के शर्मिंदा करने वाले इस खेल का विरोध किया जा सके.”

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फ़ेसबुक पेज पर लिखा है, “केरल के देवाश्वम बोर्ड के प्रमुख ने सेक्सिस्ट स्टेटमेंट दिया है कि महिलाओं को तभी मंदिर में दाख़िल होने दिया जाएगा जब ऐसी मशीनें आ जाएंगी जो ये चेक करें कि महिलाओं को मासिक धर्म चल रहा है या नहीं. इस बयान से उन्होंने महिला घृणा की पुष्टि की हैै और उन मिथकों एवं अंधविश्वासों को मज़बूत किया है जो महिलाओं के चारों ओर से कमजोर कर रही हैं.”

सोशल मीडिया में इस पेज पर महिलाओं की प्रतिक्रिया की बाढ़ आ गई. इस पेज पर बहुत से पुरुषों ने भी महिलाओं का समर्थन किया है.

उधर बोर्ड के अध्यक्ष गोपालाकृष्णन ने अपने एक बयान में कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था. “ये तो ऐतिहासिक परंपरा है कि दस वर्ष से बड़ी और पचास वर्ष से कम उम्र की महिला साबरीमला मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती.” कोल्लम प्रेस क्लब में उनसे किसी ने ऐसा पूछा था कि अगर ऐसी कोई मशीन इजाद हो जाए तो क्या उसे मंदिर में लगाया जाएगा, तो उन्होंने कहा था कि इस बारे में सोचा जाएगा.

इस पोस्ट से जुड़ी राय आप हमें कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं.

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