पढ़िए क्यों अमेरिका में 14 साल का लड़का गया जेल.

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पढ़िए क्यों अमेरिका में 14 साल का लड़का गया जेल.

अमेरिका दुनियां को यह दिखाता है कि वह दुनियां सबसे उदारवादी देश हैं . जहां लोकतांत्रिक एवं मानवाधिकार मूल्यों को साथ कभी नहीं समझौता किया जाता हैं . गाहे-बगाहे वह विश्व के अन्य देशों को भी इसकी नसीहत दिया करता हैं . अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा जब भारत आये थे तो उन्होंने भारत को यह सलाह दी थी कि भारत को धार्मिक कट्टरता पर काबू पाना चाहिए . लेकिन आज उसी अमेरिका में एक 14 साल मासूम बच्चे को सिर्फ इसलिए गिरफ़्तार कर लिया जाता है कि वह खुद से बनाया गया एक घड़ी स्कूल में लेकर चला गया था . उस लड़का का नाम “अहमद मोहम्मद” हैं . यही कारण बना उसके गिरफ़्तार होने का और उस पर बम बनाने का आरोप लगा दिया गया .

AHMAD MOHMMAD
अहमद को गिरफ़्तार करते हुए पुलिस

गिरफ़्तार होते समय वह लगातार यह बात कहता रहा कि यह बम नहीं है . ना ही वह कोई आतंकवादी हैं . उसे अपने पिता से भी फ़ोन पर बात नहीं करने दिया गया और उसके हाथ में हथकड़ी लगा दी गई . स्कूल ने भी उसे 3 दिन के सस्पेंड कर दिया .

अहमद मोहम्मद अमेरिका के टेक्सस में रहता है और उसने उम्र के 14 वें बरस में कदम रखा है. अहमद के पिता ने इसी बरस उसे टेक्सस के मैकआर्थर स्कूल की नवीं कक्षा में दाखिल कराया है.

उसका कमरा देखकर आप ये अंदाजा लगा सकते हैं कि अहमद मोहम्मद सामान्य छात्र नहीं है. इलेक्ट्रॉनिक्स और गजट बनाने का सामान उसकी टेबल पर बिखरा रहता है. अहमद मिनटों इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने में महारत रखता है. ये उसका शौक भी है जुनून भी और दरअसल यही उसका जुर्म भी है. अमेरिका जैसे तथाकथित महान देश में.

ahmad
source- www.presstv.com

अपने कमरे में रविवार की रात उसने अपने पेंसिल बॉक्स को एक डिजिटल घड़ी में बदल दिया. इंटरनेट की मदद से पहले सर्किट बनाया और फिर उसे बिजली से चलने लायक बनाया. उसकी ये घड़ी सही वक्त भी बताने लगी. ये सब उसने 20 मिनट में किया था लेकिन उसकी बनाई इस घड़ी ने उसके अगले 24 घंटों को जीवन की सबसे बुरी याद में बदल दिया.

उत्साह से भरा हुआ अहमद सोमवार की सुबह अपने मैकऑर्थर हाईस्कूल गया. स्कूल पहुंचते ही वो सबसे पहले अपनी इंजीनियरिंग की टीचर के पास पहुंचा और अपने हाथों  से बनी डिजिटल घड़ी दिखाई इस उम्मीद में कि उसे शाबाशी मिलेगी. लेकिन टीचर ने कहा कि ये बहुत अच्छा है लेकिन मेरा सलाह है कि तुम इसे किसी दूसरे टीचर को मत दिखाना.

अहमद ने बात मान ली और अपनी क्लास में वापस चला गया. अपनी बनाई घड़ी को उसने फिर से बैग में रख लिया था लेकिन अंग्रेजी की अगली क्लास में उसकी घड़ी से बीप की आवाज आने लगी.

इस आवाज ने पूरी क्लास को चौंका दिया और अंग्रेजी की टीचर को भी. अंग्रेजी टीचर के पूछने पर अहमद ने उन्हें भी अपनी बनाई घड़ी दिखाई और पूरी बात बता दी. लेकीन अंग्रेजी टीचर ने कहा ये घड़ी तो नहीं लगती. ये तो किसी बम जैसी नजर आ रही है.

अहमद को शाबाशी नहीं शक की नजर से देखा गया. टीचर ने घड़ी जब्त कर ली और मैकऑर्थर स्कूल के प्रिंसिपल से अहमद की शिकायत कर दी.

प्रिंसिपल ने इसकी ख़बर पुलिस को दे दी और अमेरिकी पुलिस के अधिकारी ने अहमद के साथ किसी अपराधी की तरह बर्ताव किया.

पुलिसवाला अच्छा तो यही है वो लड़का, मैं भी यही सोच रहा था.

पुलिसवाला तो तुम बम बनाने की कोशिश कर रहे थे?

अहमद नहीं मैं तो घड़ी बनाने की कोशिश कर रहा था.

पुलिसवाला अच्छा.. मुझे तो ये किसी फिल्म में दिखाए जाने वाले बम जैसा ही दिख रहा है.

इसके बाद अहमद को स्कूल से पुलिस के हेडक्वार्टर ले जाया गया और वहां उसके फिंगरप्रिंट भी लिए गए. उन पलों की दहशत भरी कहानी अब अहमद कभी नहीं भूल पाएगा.

पुलिस की पूछताछ के बाद बम बनाने का जो आरोप मैकऑर्थर रोड की तीन टीचरों ने लगाया था वो खारिज हो गया. अहमद को छोड़ दिया गया.

अब अमेरिकी पुलिस अहमद की गिरफ्तारी को स्कूल और देश की सुरक्षा से जोड़कर जरूरी बता रही है. लेकिन पुलिस के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि आखिर 14 साल के बच्चे को हथकड़ी क्यों लगाई गई?

अहमद के साथ हुई इस घटना के बाद उसके पिता मोहम्मद ने इस पूरी घटना को अमेरिका में पलने वाले नस्लवाद से जोड़ा है. दरअसल अहमद मोहम्मद और उनका परिवार अफ्रीकी देश सूडान का रहने वाला है.

इस घटना के बाद अहमद ने अपना जो दर्द बयां किया है वो भी मुस्लिमों के लिए आम अमेरिकी के रवैये को ही दिखाता है. मुझे लगा कि मैं कोई अपराधी हूं. मुझे लगा कि मैं कोई आतंकवादी हूं. मुझे लगा कि मैं वो सब कुछ हूं जो मुझे मेरे नाम की वजह से कहा जाता रहा है. मिडिल स्कूल में मुझे आतंकवादी कहा जाता था. मुझे बम बनाने वाला कहा जाता था और ये सब मेरे धर्म और नस्ल की वजह से होता था.

महज 14 साल की उम्र में जो कुछ अहमद के साथ हुआ क्या वो उसे भूल पाएगा और वो भी तब जब इस घटना के बाद भी स्कूल माफी मांगने को तैयार नहीं है.

लेकिन अहमद अब सेलेब्रेटी हो गया है.

एक घड़ी बनाने पर हुई गिरफ्तारी अहमद की जिंदगी को बदल दिया है. जैसे ही उसकी हथकड़ी लगी तस्वीर सामने आई अहमद का साथ देने के लिए पूरी दुनिया उठ खड़ी हुई हैं.

14 साल की उम्र में उसने पहली बार अपना ट्विटर एकाउंट खोल लिया है. शायद इसलिए कि उसे उम्मीद नहीं थी कि उसकी तकलीफ को सारी दुनिया ने समझा है और उसे सबका शुक्रिया अदा करना है.

अहमद का पहला ट्वीट है कि आपके समर्थन के लिए शुक्रिया. मैं नहीं सोचा था कि लोगों को एक मुस्लिम लड़के की तकलीफ से भी फर्क पड़ता है.

अहमद ने दूसरा ट्वीट किया कि मेरे साथियों, समर्थकों आपका शुक्रिया. हम इस नस्लवादी भेदभाव को मिलकर खत्म कर सकते हैं और इसे दोबारा होने से रोक सकते हैं.

उसे अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा व्हाइट हाउस आने का न्योता मिला है. सबसे पहले व्हाइट हाउस ने मीडिया में अहमद के समर्थन का ऐलान किया.

barak obama
source- www.twitter.com

इस ऐलान के बाद आया अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का ये ट्वीट जो पूरे अमेरिका के लिए और खासतौर से अहमद के स्कूल के लिए एक संदेश था. अच्छी घड़ी है अहमद. क्या तुम इसे व्हाइट हाउस में लाना चाहोगे? हमें तुम्हारे जैसे बच्चों को विज्ञान से जुड़ने की प्रेरणा देनी चाहिए है. यही तो अमेरिका को महान बनाता है.

विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भी अहमद का हौसला बढ़ाया. उन्होंने ट्वीट में लिखा पूर्वाग्रह और भय हमें सुरक्षित नहीं बनाते, वो हमें पीछे धकेलते हैं. अहमद, उत्सुक रहो और बनाते रहो.

अहमद को फेसबुक के मालिक जुकरबर्ग ने भी उसे फेसबुक के ऑफिस आने का न्योता दिया है. अहमद अगर तुम कभी भी फेसबुक के दफ्तर आना चाहो तो मुझे तुमसे मिलने में खुशी होगी.

mark zuckerberg
source- www.facebook.com

ये चंद शब्द अहमद के लिए मरहम का काम कर रहे हैं. अहमद को अब वो हौसला मिल गया है कि अब वो अपने स्कूल के खिलाफ भी आवाज उठा रहा है.

न्यूयॉर्क में नई खोजों के लिए होने वाले सालाना समारोह का न्योता उसे मिल गया है. ये समारोह अगले हफ्ते ही शुरू होने वाला है और अहमद को खासतौर से इस समारोह में अपनी घड़ी के साथ आने के लिए कहा गया है.

यही नहीं गूगल जैसी कंपनी के साइंसफेयर विंग ने भी अहमद को बुलावा भेजा है. हाय अहमद, हम तुम्हारे लिए इस हफ्ते के अंत में होने वाले गूगल साइंस फेयर में एक सीट सुरक्षित कर रहे हैं. क्या आना चाहोगे?  अपनी घड़ी जरूर लाना.

 बॉक्स क्लाउड कंपनी के सीईओ ने तो अहमद को अपने साथ काम करने की पेशकश कर दी है. कंपनी के सीईओ एरॉन लेवी ने ट्वीट में लिखा है अहमद मुझे पता है कि तुम्हें व्हाइट हाउस और फेसबुक का न्योता मिल चुका है लेकिन मैं जानता हूं कि तुम भीतर से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हो तुम बॉक्स में चले आओ.

ये हौसलाअफजाई अहमद के टूटे हुए सपनों को जोड़ने की कोशिश है और अहमद भी अब जिंदगी की नई पारी शुरू करना चाहता है.

आपको यह लेख कैसा लगा और आप क्या सोचते है इस घटना को लेकर? अपनी राय हमें जरुर कमेट बॉक्स में दे .  

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