जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या बताया ट्रांसजेंडर और समलैंगिक की परिभाषा

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जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या बताया ट्रांसजेंडर और समलैंगिक की परिभाषा

यह बात सही है कि बहुत सारें लोग ट्रांसजेंडर और समलैंगिक को एक ही समझते हैं. क्योंकि दोनों की मनोदशा एवं शारीरिक रूप से अलग होते है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. तो चलिए निचे बतातें है कि कैसे सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर और समलैंगिक को अलग-अलग परिभाषित किया.

source- bbc.com
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार की तरफ से दाखिल एक याचिका की सुनवाई करते हुए ट्रांसजेंडरों की परिभाषा बताई. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रांसजेंडर समलैंगिक नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समलैंगिक समुदाय के लोगों को ट्रांसजेंडर में शामिल नहीं किया जा सकता है. सिर्फ थर्ड जेंडर यानी गे, लेस्बियन अथवा बायसेक्सुअल ही ट्रांसजेंडर हैं. कोर्ट ने कहा कि सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय को रिजर्वेशन देने की दिशा में जल्द से जल्द कदम उठाए.

source- cnn.com
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आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने ट्रांसजेंडर की परिभाषा देने संबंधी याचिका कोर्ट में दाखिल की थी. सरकार की ओर से दायर याचिका  में कहा गया था कि क्या लेस्बियन समुदाय के लोगों को ओबीसी के अंतर्गत माना जाए और अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलने वाली सुविधाएं इस समुदाय को भी दी जाएं? केंद्र सरकार ने कोर्ट से इस संबंध में भी स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समलैंगिक समुदाय के लोगों को ट्रांसजेंडर में शामिल नहीं किया जा सकता है.

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