क्रिसमस: खुशियों की सौगात

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क्रिसमस: खुशियों की सौगात 

ढेर सारी खुशियों की सौगात लिए फिर से क्रिसमस दरवाजे पर दस्तक दे रहा है. लोगों ने अपने घर, ऑफिस, दुकाने तरह-तरह से सजाने शुरु कर दिए हैं. यह त्यौहार पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है. भारत में भी यह त्यौहार काफी प्रचलित है. बच्चों में इस त्यौहार के लिए खासा उत्साह रहता है. सांता क्लाज़ का इंतजार बच्चों को पूरे साल भर रहता हैं, उससे मिलने वाले गिफ्ट्स की उम्मीद में बच्चें अपने क्रिसमस शॉक्स क्रिसमस की शाम को बाहर लटकाते है, ताकि सांता क्लाज़ रात में आये और उनमें गिफ्ट रख जाये. बच्चों के बीच क्रिसमस के बारे में तरह-तरह की कहानियां प्रसिद्ध है, उनके लिये ये त्यौहार खुशियों का पिटारा लेके आने वाला होता है. भारत एक विविधताओं से भरा देश है, और यह त्यौहार भारत में भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है.

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क्रिसमस के पीछे की मान्यता:

क्रिसमस के दौरान ही प्रभु यीशु का जन्म हुआ था. बाइबिल में भी कहा गया है कि प्रभु यीसू का जन्म इस दुनियां से छोटे-बड़े, अमीर-गरीब, ऊँच-नीच के भेदभाव को मिटाने के लिये हुआ था. प्रभु यीसू ने गरीब कुल में जन्म लेकर गरीबों, असहायों के उत्थान के लिये इस धरती पर कदम रखा था. बाइबिल के अनुसार, ईश्वर ने अपने भक्त याशायाह के माध्यम से 800 ईसा पूर्व ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि इस दुनिया में एक राजकुमार जन्म लेगा और उसका नाम इमेनुएल रखा जाएगा. इमेनुएल का अर्थ है ‘ईश्वर हमारे साथ’. इस प्रकार प्रभु यीसू ने धरती पर जन्म लिया.

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क्रिसमस और सांता क्लाज़:

क्रिसमस का नाम याद आते ही सबसे पहले सांता क्लाज़ का नाम जहन में आता है, और याद आती है उनकी सफ़ेद दाढ़ी, वो सफ़ेद लाल ड्रेस और पीठ पर गिफ्ट्स का थैला. हालांकि ईसामसीह और सांता का कोई कनेक्‍शन नहीं है. सांता की उत्‍पत्ति के बारे में किसी को पता नहीं, लोग मानते है सेंट निकोलस ही सांता का असल रूप हैं, जो एक पादरी थे और बच्चों को बहुत पसंद करते थे तथा उपहार बाटते थे. सांता बच्चों का फेवरिट है और क्रिसमस के दिन सभी बच्चों को संता क्लोज का बेसब्री से इंतजार रहता है.

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क्रिसमस ट्री का जन्म:

क्रिसमस से जुड़ी दूसरी महत्वपूर्ण चीज़ है क्रिसमस ट्री, क्रिसमस के दिन इसे तरह-तरह की सजावट करके घर में रखा जाता है, जिसमे गिफ्ट्स लटकाए जाते है. माना जाता है कि क्रिसमस ट्री का आरम्भ आठवीं शताब्दी में जर्मनी से हुआ. जहाँ बोनिफेस नामक एक अंग्रेज धर्म प्रचारक ने इसे प्रचलित किया.

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क्रिसमस ट्री को सजाने के पीछे एक बीमार बच्चे जोनाथन की विश जुड़ी हुई है. सन 1912 में जब जोनाथन बहुत बीमार पड़ गया तो उसने अपने पिता जी से क्रिसमस ट्री को सजाने का अनुरोध किया. बेटे की विश पूरी करने के लिए उन्होंने क्रिसमस ट्री को फूल, पत्तियों, रंगबिरंगे कागजों और फलों से सजाया. तभी से दुनिया भर में क्रिसमस ट्री को तरह-तरह से सजाने की प्रथा चली आ रही है.

खुशियों और उत्साह का यह त्यौहार आपके जीवन में भी ढेर सारी खुशियां लेकर आये, सैंटा आपकी हर विश पूरी करे.

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