भारत में पहली बार जन्म हुआ ‘हार्लेक्विन बेबी’ का लेकिन…

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भारत में पहली बार जन्म हुआ ‘हार्लेक्विन बेबी’ का लेकिन…

महाराष्ट्र के नागपुर में जन्मी भारत की पहली ‘हार्लेक्विन बेबी’ की दो दिन बाद ही मौत हो गई. सोमवार रात तक डॉक्टर्स की लगातार कोशिशों के बावजूद बच्ची को बचाया नहीं जा सका. दुनिया में इस डिसऑर्डर से जूझने वाला यह तीसरा बच्चा था. इस बीमारी में बच्चे की आउटर स्किन डेवलप नहीं हो पाती. बॉडी के इंटरनल ऑर्गन्स साफ-साफ नजर आते हैं. स्किन सफेद मोदी प्लेटों में बंट जाती है. इसमें कई गहरी दरारें होती हैं. नागपुर के लता मंगेशकर हॉस्पिटल की डीन डॉ. काजल मित्रा ने बताया कि बच्ची को सुबह से ही सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. उसे वेंटीलेटर पर रखा गया था. harley quinn-baby-postdekho

गौरतलब है कि शनिवार शाम को महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में अमरावती की रहने वाली 23 साल महिला ने इस बच्ची को जन्म दिया था. 1.8 किलो का ये बच्चा रेयर बॉर्न डिसीज हार्लेक्विन एचथियोसिस से जूझ रहा था. डॉक्टरों ने बताया कि महिला ने गर्भधारण के बाद एक भी बार सोनोग्राफी नहीं कराई थी. अगर महिला ने एक बार भी सोनोग्राफी कराई होती तो इसके बारे में पहले ही पता चल जाता.
इसके बाद गर्भ के पानी का टेस्ट करके बच्चे की बीमारी का पता लगाया जा सकता था. डॉक्टरों का कहना था कि यह मामला अपने आप में अलग था. ऐसे केस में स्किन पर हमेशा वैसलीन आदि लगाने की सलाह दी है. इलाज के बाद भी स्किन पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती.
दुनिया में 1750 से अब तक ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसा पहला बच्चा अमेरिका के साउथ कैरोलीना में अप्रैल 1750 में जन्मा था. हाल ही में जर्मनी और पाकिस्तान में भी ऐसे बच्चे जन्मे थे. देश में यह पहला मामला माना गया था.

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